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MCQs | Class 10 | Geography | Chapter-2, Forest and Wildlife Resources

Class 10 Social Science (Geography) MCQs Chapter 2 – Forest and Wildlife Resources

MCQs, Class 10 NCERT, Geography, Chapter – 2, Forest and Wildlife Resources

MCQs | Class 10 | Geography | Chapter-2, Forest and Wildlife Resources
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The most important questions for practice for the examination 2022.

Class 10 Geography, Chapter – 2, Forest and Wildlife Resources.

All the Best…!

Narayan Subbarao Hardikar – Freedom Fighters of India

Narayan Subbarao Hardikar – Freedom Fighters of India

Narayan Subbarao Hardikar - Freedom Fighters of India by Learners inside
Narayan Subbarao Hardikar – Freedom Fighters of India by Learners inside

सुब्बाराव हार्डिकर – आरंभिक जीवन

स्वाधीनता सेनानी डॉक्टर नारायण सुब्बाराव हार्डिकर का जन्म 26 अगस्त 1889 में धारवाड में हुआ था। उन्होंने कांग्रेस सेवा दल की स्थापना की थी। उनके पिता का नाम सुब्बाराव और माता का नाम यमुना बाईं था।

उन्होंने कलकत्ता के कॉलेजों फिजीशियंस एंड सर्जंस में मेडिसिन का अध्ययन किया।

उसके बाद हार्डिकर उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए। अमेरिका में उनकी मुलाकात लाला लाजपत राय से हुई और वे उनके निकट सहयोगी बन गए।

Tanguturi Prakasam in Hindi – Freedom Fighters of India

डॉक्टर सुब्बाराव हार्डिकर – अमेरिका मे सक्रियता

हार्डिकर अमेरिका में कई राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हो गए। वे हिंदुस्तान एसोसिएशन ऑफ अमेरिका के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने शिकागो में भारतीय विद्यार्थियों का सम्मेलन आयोजित किया। वे होमरूल लीग में भी शामिल हुए जिसकी स्थापना लाला जी ने की थी।

लाला जी के साथ हार्डिकर ने यंग इंडिया पत्रिका भी प्रकाशित की। अमेरिका और कनाडा में रहने के दौरान उन्होंने वहां रहने वाले भारतीयों को भारत के स्वाधीनता संघर्ष की जानकारी दी।

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हार्डिकर – स्वाधीनता आंदोलन

हार्डिकर ने स्वाधीनता संघर्ष के दौरान कई आंदोलनों में हिस्सा लिया। झंडा जुलूस में शामिल लोगों पर ब्रिटिश पुलिस के अत्याचार और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के विरोध में कांग्रेस ने झंडा सत्याग्रह आरंभ किया। हार्डिकर के नेतृत्व में ये आंदोलन नागपुर में शुरू हुआ। वे कई बार जेल गए।

इस दौरान डॉक्टर हार्डी करने ऐसे संगठन के बारे में सोचा जिसमें उत्तम चरित्र वाले अनुशासित और प्रशिक्षित युवा शामिल हो। इसका परिणाम 27 दिसंबर 1923 को कांग्रेस के काकीनाडा अधिवेशन में सेवा दल के गठन के रूप में सामने आया। सेवा दल ने नागरिक अवज्ञा आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

डॉक्टर हार्डिकर ने 1925 में मासिक पत्रिका वॉलेंटियर का प्रकाशन शुरू किया और पूरी तरह से सेवा दल के लिए समर्पित हो गए।

डॉक्टर हार्डिकर 1952 से 1962 तक दो बार राज्यसभा सांसद रहे। उन्हें 1958 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।

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मृत्यु

26 अगस्त 1975 को डॉक्टर हार्डिकर का निधन हो गया। उनकी जन्मशती की स्मृति में 1989 में डाक टिकट भी जारी किया गया।

Netaji Subhash Chandra Bose in Hindi – Freedom Fighters of India

Subodh Roy in Hindi – Freedom Fighters of India

Subodh Roy – Freedom Fighters of India

Contribution of Subodh Roy - Freedom Fighters of India - Learners Inside
Contribution of Subodh Roy – Freedom Fighters of India by Learners Inside.

सुबोध राय – परिचय

इस लेख के माध्यम से हम जानेंगे महान क्रांतिकारी सुबोध रॉय के बारे में।

सुबोध रॉय का जन्म 26 अगस्त 1915 को चिट्टागोंग में हुआ था। रॉय भारत के स्वाधीनता आंदोलन से प्रभावित क्रान्तिकारी समाजवादी थे। वे प्रसिद्ध चिट्टागोंग हथियारों की लूट की टीम में सबसे युवा क्रांतिकारी थे। सुबोध रॉय को झुमको रॉय के नाम से भी जाना जाता था।

योगदान

रिवोल्युशनरी इंडियन सोशलिस्ट पार्टी के नेता सूर्यसेन ने 1930 में चिटगांग में अंग्रेजों के हथियारों की मालखाने पर छापा मारने की योजना बनाई। योजना के तहत चिट्टागोंग में दो मालखानों पर कब्जा करना शामिल था।

क्रांति की ज्वाला को और तेज करने के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से चिट्टागोंग में इंपीरियल बैंक को लूटना और क्रांतिकारियों को जेल से छुडाना भी योजना का हिस्सा था। 18 अप्रैल को इस योजना पर अमल किया गया।

क्रांतिकारियों के एक समूह ने यूरोपियन क्लब के मुख्यालय पर कब्जा कर लिया। क्रांतिकारी पुलिस के मालखाने के बाहर एकत्र हो गए जहां सूर्यसेन ने सैन्य सलामी ली। राष्ट्रीय ध्वज फहराया और अंतरिम रिवोल्युशनरी सरकार की घोषणा की।

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क्रांतिकारी भोर होने से पहले ही चिट्टागोंग से निकल पडे और चिट्टागोंग हिल रेंज की तरफ भडने लगे। उन्हें छिपने के लिए सुरक्षित ठिकाने की तलाश थी लेकिन कुछ ही दिनों में पुलिस ने उन्हें पकड लिया। मुकदमे के बाद रॉय को 1934 में पोर्टब्लेयर की सेल्यूलर जेल भेज दिया गया।

1940 में जेल से रिहा होने के बाद रॉय राजनीति में आ गए और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य बन गए। सुबोध रॉय ने कम्युनिस्ट आंदोलन के इतिहास में बडा बौद्धिक योगदान दिया। उन्होंने कम्यूनिज्म इन इंडिया – अनपुब्लिशड डॉक्यूमेंट्स (Communism in India – Unpublished Document), पुस्तक का संपादन किया।

Tanguturi Prakasam in Hindi – Freedom Fighters of India

Tanguturi Prakasam in Hindi – Freedom Fighters of India

Tanguturi Prakasam in Hindi – Freedom Fighters of India

Tanguturi Prakasam in Hindi - Freedom Fighters of India - Learners Inside
Tanguturi Prakasam in Hindi – Freedom Fighters of India – Learners Inside

इस लेख के माध्यम से हम जनेंगे स्वतंत्रता सेनानी तंगुटूरी प्रकाशम (Tanguturi Prakasam) के बारे मे।  जो आंध्र केसरी के नाम से भी लोकप्रिय हैं।

तंगुटूरी प्रकाशम – संक्षिप्त परिचय

प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी तंगुटूरी प्रकाशम का जन्म 23 अगस्त 1872 में आंध्र प्रदेश की प्रकाशम जिले में हुआ था। प्रकाशम जिले का नाम उनके नाम पर ही रखा गया। वे अंग्रेजों के खिलाफ अपने साहस और वीरता के लिए जाने जाते हैं।

तंगुटूरी प्रकासम ने मद्रास लॉ कॉलेज से विधि की स्नातक उपाधि हासिल की। चौदह साल तक वकालत करने के बाद वह इंग्लैंड गए और मद्रास उच्च न्यायालय में वकील के रूप में अहर्ता प्राप्त करने के लिए बैरिस्टर का कोर्स पूरा किया।

तंगुटूरी प्रकासम – भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

1928 की एक ऐतिहासिक घटना में साइमन कमीशन की तत्कालीन मद्रास यात्रा के दौरान वे पुलिस के सामने सीना तानकर खडे हो गए हो पूरा कर रखा है।

साइमन कमीशन के दौरान ब्रिटिश पुलिस के समक्ष प्रदर्शित वीरता के अलावा प्रकाशम 1922 में असहयोग आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने गुंटूर में 30,000 कांग्रेस स्वयंसेवकों के साथ प्रदर्शन किया।

1942 में कांग्रेस की बॉम्बे अधिवेशन के दौरान महात्मा गांधी ने अंग्रेजों भारत छोडो का उद्घोष किया। इस आंदोलन में प्रकाशन ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और तीन साल से अधिक समय तक जेल में रखा गया।

स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान प्रकाशम् ने स्वराज पत्रिका शुरू की और देशभर में राष्ट्रवादी भावनाओं को फैलाया। तंगुटूरी प्रकासम ने मद्रास लॉ कॉलेज से विधि की स्नातक उपाधि हासिल की। चौदह साल तक वकालत करने के बाद वह इंग्लैंड गए और मद्रास उच्च न्यायालय में वकील के रूप में अहर्ता प्राप्त करने के लिए बैरिस्टर का कोर्स पूरा किया।

Sahodaran Ayyappan – A social reformer of Kerala Freedom Fighters of India

तंगुटूरी प्रकाशम – गांधी जी 

लंदन जाने वाले जहाज पर पहली बार उनकी मुलाकात गांधी जी से हुई। वे स्वतंत्रता संग्राम के प्रति गांधीजी के दृष्टिकोण से प्रभावित हुए। उन्होंने आजादी से पहले चार बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में काम किया। उन्होंने तत्कालीन मद्रास और आंध्र राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में भी काम किया।

उनकी प्रशासनिक क्षमता राज्य के कई क्षेत्रों में उनके महत्वपूर्ण निर्णयों में परिलक्षित होती है। मद्रास प्रांत के लिए उनके द्वारा तैयार की गई जमींदारी उन्मूलन रिपोर्ट देश से जमींदारी प्रथा को समाप्त करने के भारत सरकार के प्रयासों का अग्रदूत बन गई।

Satyamurthy and P. Krishna Pillai in Hindi – Freedom Fighters of India

मृत्यु

20 मई 1957 को तंगुटूरी प्रकासम ने अंतिम सांस ली और देश ने अपने महानतम सपूतों और स्वतंत्रता सेनानियों में से एक को खो दिया। देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले ऐसे महापुरूषों का हम लोग सदैव आभारी रहेंगे।

Madam Bhikaji Cama in Hindi – Freedom Fighters of India

Madam Bhikaji Cama in Hindi – Freedom Fighters of India

मैडम भीकाजी कामा – आरंभिक परिचय

Madam Bhikaji Cama in Hindi - Freedom Fighters of India
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बीकाजी कामा, मैडम कामा के नाम से भी जाना जाता है। भीकाजी कामा जन्म 24 सितंबर 1861 को प्रभावशाली पारसी परिवार में हुआ था।

अदम्य साहस और सत्यनिष्ठा की धनी भीकाजी कामा ने अपना अधिकांश समय समाज कार्य में बिताया। राष्ट्र के प्रति अटूट प्रेम के कारण उन्होंने पारिवारिक जीवन त्याग दिया और अपना जीवन राष्ट्र हित के लिए समर्पित कर दिय।

अक्टूबर 1896 में बॉम्बे प्रेसिडेंसी में भीषण अकाल पडा और उसके कुछ दिन बाद ही प्ले की महामारी फैल गई। इस दौरान भीकाजी कामा ने पीडित लोगों की खूब सेवा की।

22 अगस्त 1907 में मैडम भीकाजी कामा ने जर्मनी के स्वीट काट में दूसरे अंतरराष्ट्रीय सोशलिस्ट सम्मेलन में भारत का प्रथम राष्ट्रीय ध्वज फहराया था।

Satyamurthy and P. Krishna Pillai in Hindi – Freedom Fighters of India

मैडम भीकाजी कामा – योगदान

1905 में मैडम कामा पेरिस चली गई और वहाँ पे पेरिस इंडिया सोसायटी की स्थापना में सहभागी बनें । नीदरलैंड और स्विट्जरलैंड में अज्ञातवास के दौरान काम आने आंदोलन के लिए वंदे मातरम नामक क्रांतिकारी साहित्य भी लिखा और प्रकाशित कराया।

उन्होंने मदनलाल ढींगडा को फांसी दिए जाने के विरोध में मदन की तलवार पत्रिका लिखी हूँ।

आज ही के दिन (22 अगस्त) में कामा जर्मनी के स्टटगार्ट में दूसरे अंतरराष्ट्रीय सोशलिस्ट सम्मेलन में शामिल हुई। वहाँ उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप में अकाल के विनाशकारी प्रभाव के जानकारी दी।

Netaji Subhash Chandra Bose in Hindi – Freedom Fighters of India

मैडम कामा – ध्वजारोहण

ग्रेट ब्रिटेन से स्वतंत्रता और समानता की अपील के दौरान मैडम कामा ने ध्वज फहराया और उसे भारत की स्वतंत्रता का ध्वज कहा गया। इस प्रकार वे भारतीय क्रांतिकारियों की माँ के रूप में प्रसिद्ध नहीं हूँ।

कामा का ध्वज कलकत्ता ध्वज का संशोधित रूप था। उसका डिजाइन कामा और विनायक दामोदर सावरकर ने बनाया था। वह उन सभी झंडों में शामिल था जिनके आधार पर मौजूदा राष्ट्रीय ध्वज बनाया गया।

मैडम भीकाजी कामा उन महान विभूतियों में अग्रणी थी जिन्होंने विदेश में रहकर भारत की स्वतंत्रता की मशाल जलाई।

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मृत्यु

मैडम कामा का स्वर्गवास बॉम्बे में 13 अगस्त 1936 को हो गया।

MCQs, Class 10 NCERT | Economics | Chapter – 5 | Consumer Rights

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The most important questions for practice for the examination 2022

History Class 10, Chapter – 5 – Consumer Rights

All the Best…!

P. Jeevanantham in Hindi – Freedom Fighters of India

P. Jeevanantha – Freedom Fighters of India

P. Jeevanantham in Hindi - A Social reformer - Freedom Fighters of India
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पीo जीवनंथम का जन्म तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले में 21 अगस्त 1907 को हुआ था। वे न केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी, सामाजिक राजनीतिक नेता थे बल्कि एक सांस्कृतिक विचारक, श्रेष्ठ वक्ता, पत्रकार और आलोचक भी थे।

इन सब के अलावा वे वंचितों के अधिकारों के लिए लडने वाले प्रमुख नेता थे। सार्वजनिक जीवन में उनकी छवि साफ सुथरी रही और उनका जीवन बहुत गरीबी में बीता ।

Sahodaran Ayyappan – A social reformer of Kerala

जीवनंथम का राजनीतिक जीवन

जीवनंथम ने अपना राजनीतिक जीवन गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित होकर शुरू किया था। 1924  में उन्होंने वाई काम सत्याग्रह में भाग लिया। उन्होंने सुचिंद्रम मंदिर में अछूत माने जाने वाले लोगों के प्रवेश करने की मांग करने वाले प्रदर्शन में भाग लिया।

Satyamurthy and P. Krishna Pillai in Hindi – Freedom Fighters of India

जीवनंथम एवं गांधीजी

सर्वंव्याल आश्रम में अपने प्रवास के दौरान उन्होंने गांधीजी को पत्र लिखकर उनके कुछ सिद्धांतों पर असहमति व्यक्त कि गांधीजी जब मद्रास आए तो जीवनंथम का पत्र गांधीजी की जेब में था और वे जीवनंथम से मिलना चाहते थे। सर्वंव्याल आश्रम में जब गांधीजी पहुंचे तो 25 वर्षीय जीवनंथम से मिलकर चकित रह गए।

Netaji Subhash Chandra Bose in Hindi – Freedom Fighters of India

जीवनंथम – राष्ट्रीय आंदोलन 

जीवनंथम की राष्ट्रभक्ति ने उन्हें राष्ट्रीय आंदोलन की ओर मोड दिया और जाति आधारित पक्षपात के खिलाफ उन्होंने आत्मसम्मान आंदोलन का नेतृत्व किया। जीवनाथम ने तमिलनाडु में श्रम आंदोलन को मजबूत करने के लिए अग्रणी भूमिका निभाई।

तमिल कवि सुब्रमन्यम भारती के कार्यों का उनके जीवन पर बहुत प्रभाव पडा। वे तमिल साहित्य के अच्छे ज्ञाता और श्रेष्ठ वक्ता थे। जीवनंथम ने भगत सिंह के निबंधों का तमिल भाषा में अनुवाद किया।

देश आजाद होने के बाद पहले आम चुनाव में जीवनंथम विधायक बने और तमिलनाडु के विकास के लिए काम किया।

A Beautiful Motivational Story in Hindi of a Genius खूबसूरत प्रेरणादायक कहानी..!

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जय हिंद जय भारत…!

Freedom Fighters of India

Sahodaran Ayyappan – A social reformer of Kerala

Sahodaran Ayyappan – A Social reformer of Kerala

Sahodaran Ayyappan - A Social reformer - Freedom Fighters of India
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भारत के महानतम स्वतंत्रता सेनानियों में से एक सहोदरन अयप्पन जाने जाते हैं। आज के लिख में हम संछिप्त जानेंगे स्वतंत्रता सेनानी सहोदरन अयप्पन के बारे में।

परिचय

केरल के समाज सुधारक और चिंतक अयप्पन का जन्म 21 अगस्त 1889 को एर्नाकुलम के चेन्नई में हुआ था। वे श्री नारायण गुरु की विचारधारा से प्रभावित थे, इसलिए अय्यप्पन उनके शिष्य बन गए।

योगदान

निष्ठावान राष्ट्रवादी अयप्पन ने 1928 में युक्तिवाध (Yukthivadh) नामक पत्रिका निकली ताकि स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे की भावना का प्रचार प्रसार किया जा सके। अयप्पन ने केरल में मिश्र भोजन अब का आयोजन शुरू किया।

मिश्र भोजन

मिश्र भोजन को केरल के पुनर्जागरण आंदोलन में मील का पत्थर माना जाता है। इसमें सभी जातियों के लोगों ने एक साथ भोजन किया। समाज में भाईचारे को प्रोत्साहन देने के लिए अयप्पन ने सहोदरन पत्रिका शुरू की। इसका प्रभाव भी था कि अयप्पन के नाम के साथ सहोदरन भी जुड गया।

मृत्यु

06 मार्च 1968 को अयप्पन ने दुनिया से विदा ली, लेकिन केरल के सामाजिक – सांस्कृतिक पुनर्जागरण इतिहास में सहोदरन का योगदान सदैव स्मरण किया जाता रहेगा।

Madan Lal Dhingra UPSC in Hindi – Freedom Fighters of India

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जय हिंद जय भारत…!

Freedom Fighters of India